Warning: sprintf(): Too few arguments in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/themes/default-mag/assets/libraries/breadcrumb-trail/inc/breadcrumbs.php on line 254

अब पड़ोसी का कश्मीर राग का सुर बदल जाएगा

कंवल सिब्बल, पूर्व विदेश सचिव

अनुच्छेद-370 और 35-ए के प्रावधानों को हटाने, लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करने और दोनों को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का केंद्र सरकार ने साहसिक और ऐतिहासिक फैसला किया है। किसी को भी यह अंदाज नहीं होगा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद इतनी जल्दी यह कदम उठाएगी। निश्चय ही, सरकार ने इस महत्वपूर्ण निर्णय पर पहुंचने से पहले इसके घरेलू और बाहरी, दोनों परिणामों को आंका होगा। हालांकि अब भी यदि कोई परेशानी, खासतौर पर घरेलू मुश्किलें आती हैं, तो उनको जल्द ही दूर कर लिया जाएगा और कश्मीर को अलग रखने एवं राष्ट्र की कीमत पर राजनीति में अलगाववाद भड़काने की ऐतिहासिक गलती शीघ्र दुरुस्त कर ली जाएगी।

भारत सरकार के इस रुख से पाकिस्तान का भौंचक रह जाना स्वाभाविक ही है, क्योंकि यह कदम कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान वार्ता की रूप-रेखा को पूरी तरह से बदल देगा। द्विपक्षीय बातचीत को बनाए रखने के लिए भारत ने लंबे अरसे से कश्मीर पर रक्षात्मक रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने इसके लिए जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी ‘लंबित मुद्दों’ पर बातचीत करने की हामी भरी और आतंकवाद को भी बर्दाश्त किया। लेकिन अब, जब देश में कश्मीर की घरेलू स्थिति पूरी तरह से बदल गई है और अब यह केंद्र शासित प्रदेश बन गया है; लद्दाख को भी इससे अलग कर दिया गया है, तब कश्मीर मसले पर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत का आधार ही खत्म हो गया है।

अब भारत की नजर में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर दावे को छोड़कर कोई ‘लंबित मसला’ नहीं बचा। इसी पाक-अधिकृत कश्मीर में गिलगित और बाल्टिस्तान भी शामिल हैं। अब कश्मीर मसले के हल के लिए किसी पिछले दरवाजे की जरूरत भी खत्म हो गई है। इस कदम से वह कथित ‘चार सूत्रीय फॉर्मूला’ भी अपना अर्थ खो चुका है, जिसके समर्थक भारतीय हल्कों में भी हैं। तयशुदा एजेंडे के साथ पाकिस्तान के साथ फिर शुरू हुई बातचीत के सभी मुद्दे, जिनमें कश्मीर भी शामिल है, अब निरर्थक हो गए हैं। हां, मोदी सरकार के इस फैसले का असर सिंधु जल समझौते पर पड़ सकता है और समझौते के तहत जम्मू-कश्मीर में बन रही भारतीय बिजली परियोजनाओं के निर्माण में पाकिस्तान अब बाधा डालने की रणनीति अपना सकता है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान के साथ संबंधों को जल्द ही ‘सामान्य’ बनाने की तमाम संभावनाओं पर फिर से विचार किया गया है। अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है, क्योंकि द्विपक्षीय रिश्ते की मौजूदा स्थिति के लिए मुख्य रूप से वही जिम्मेदार है। फिलहाल यह सोचना बेमानी है कि कश्मीर पर मोदी सरकार के ताजा फैसले के बाद वह भारत के प्रति अपनी नीतियों को बदल देगा। अलबत्ता, राजनीतिक हताशा और घरेलू दबाव में वह भारत के इस फैसले का अंतरराष्ट्रीयकरण जरूर करेगा। पाकिस्तान की मानें, तो वहां के वजीर-ए-आजम इमरान खान ने ‘भारतीय नेतृत्व के इस गैर-जिम्मेदार, एकतरफा और तर्कहीन कदम की तरफ विश्व भर के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का ध्यान खींचा है’। इस्लामाबाद ने यह ‘चेतावनी’ भी दी है कि वह भारत के इस ‘अवैध’ फैसले के खिलाफ अपने सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।

लेकिन पाकिस्तान के विकल्पों पर यदि गौर करें, तो वह हमारे खिलाफ सिर्फ दुष्प्रचार कर सकता है। भारत के फैसले के विरोध की आग को भड़काने और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ाने का काम वह कर सकता है। हालांकि यह उसके लिए जोखिम भरा कदम होगा, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में यदि वह जेहाद भड़काने की कोशिश करेगा, तो भारत न सिर्फ जवाबी कार्रवाई करेगा, बल्कि आतंकी फंडिंग रोकने के लिए बनी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) में भी उस पर दबाव बनाएगा, जिससे पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक सेहत और खराब हो सकती है। ऐसे में, लगता यही है कि पाकिस्तान इस मसले को संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सामने ले जाएगा, जो आपसी तनाव कम करने और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान आदि की वकालत करने वाले कुछ बयान जारी कर सकते हैं। मगर भारत प्रशासित क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर की सांविधानिक स्थिति को बदलने संबंधी भारतीय कानून में किसी तरह का बदलाव अंतरराष्ट्रीय मसला नहीं है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा पर किसी तरह की आंच नहीं आती। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के किसी प्रस्ताव में अनुच्छेद-370 का जिक्र नहीं है। इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के महीनों बाद भारत द्वारा संविधान में अपनी ओर से जोड़ा गया था, इसीलिए अपनी पहल से इसे हटाने का हक भी भारत को ही है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् पाकिस्तान द्वारा की जाने वाली किसी भी शिकायत पर शायद ही गौर करेगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसके सभी प्रमुख देश मानते हैं कि कश्मीर मसला भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी बातचीत से ही सुलझाया जाना चाहिए। उनकी इस सोच को शिमला समझौता मजबूत करता है। फिर, कोई भी बड़ा देश पाकिस्तान के लिए उभरते भारत के साथ अपने संबंधों को जोखिम में डालना शायद ही पसंद करे। वे भारत और पाकिस्तान के मतभेद के आदी हैं और इसमें शामिल होने से बचना चाहेंगे। हां, पाकिस्तान यह तर्क दे सकता है कि भारत कश्मीर में जो ‘तनाव’ पैदा कर रहा है, उसके कारण अफगानिस्तान में अमेरिका को मदद करने में उसे मुश्किलें आ सकती हैं। मगर सच यही है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भविष्य के संभावित परिदृश्य के मद्देजर निजी तौर पर ही इस मसले को उठाना चाहेंगे। इस विवाद में पूरी तरह उतरना उन्हें शायद ही गवारा होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Next Post

छलकेगा बीसलपुर बांध! अगले चार महीने की जलापूर्ति का हुआ इंतजाम

Wed Aug 7 , 2019
जयपुर। राजस्थान में कई दिनों से हो रही बारिश ( heavy rain in Rajasthan ) के चलते प्रदेशवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। राजस्थान में सक्रिय मानसून ( monsoon ) की बारिश के बाद कई जिलों की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध ( Bisalpur dam ) में जलस्तर बुधवार सुबह 6 बजे तक 308.13 आरएल मीटर हो गया है। बांध में पानी की आवक लगातार जारी है। त्रिवेणी ( Triveni ) का गेज फिर से 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी के साथ बुधवार सुबह 6 बजे तक 1.70 मीटर था। बांध क्षेत्र में 24 एमएम बारिश दर्ज की गई। यहां […]

Breaking News


Notice: Undefined index: efbl_enable_popup in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 455

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_home in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 459

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_login in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 471

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_login in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 479

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_not_login in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 488

Notice: Undefined index: efbl_do_not_show_on_mobile in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 496

Notice: Undefined index: efbl_enable_popup in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/views/public.php on line 25

Notice: Undefined index: efbl_enable_popup in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 455

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_home in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 459

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_login in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 471

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_login in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 479

Notice: Undefined index: efbl_enabe_if_not_login in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 488

Notice: Undefined index: efbl_do_not_show_on_mobile in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/easy-facebook-likebox.php on line 496

Notice: Undefined index: efbl_enable_popup in /home/jagrukjanta/public_html/wp-content/plugins/easy-facebook-likebox/public/views/public.php on line 25

Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home/jagrukjanta/public_html/wp-includes/functions.php on line 4552