बाबाजी का चौराहा!

शिव दयाल मिश्रा
आम लोगों में अपनी प्रशंसा और नाम की भूख प्रकृति प्रदत्त होती है। कई बार आपस में बातचीत के दौरान कहा और सुना जाता है कि हमें प्रशंसा की भूख नहीं है। हमें नाम कमाने की भूख नहीं है। मगर यह बिल्कुल असत्य है। क्योंकि दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है जिसका नाम न हो। और अगर नाम है तो, या तो वह प्रसिद्ध है या फिर बदनाम है। शहरों में गलियों, बाजारों और चौक, तिराहों को भी नाम से पहचाना जाता है। अब सोचने की बात यह है कि इन चौराहों या बाजारों का नाम किसी के द्वारा रखा जाता है या स्वत: ही नामकरण हो जाता है। उदाहरण के लिए जयपुर के बाजारों का नाम संस्था, शासन या प्रशासन ने रखा है। मगर कुछ स्थान ऐसे भी होते हैं जहां नित्य कुछ काम होने से स्वत: ही उनका नामकरण हो जाता है। उदाहरण के लिए गुलाबीनगर में मालन का चौराहा, त्रिपोलिया बाजार, पांच बत्ती, जेडीए सर्किल, दूध मंडी, बजरी मंडी, बैद जी का चौराहा, बापू बाजार में एक ऐसा चौराहा है जहां चाट पकोड़ी और पतासी खूब बिकती है और वहां शाम के समय महिलाओं की भीड़ लग जाती है। जिसका नाम लेते शर्म भी आती है और हंसी भी आती है। मगर उस चौराहे का नामकरण तो हो ही गया है, चटोकड़ी…. का चौराहा। ये कुछ ऐसे उदाहरण जो नामकरण हो गया या कर दिया गया। मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो किसी न किसी रूप में अपने नाम से किसी जगह को जोडऩा चाहते हैं। वे नित्य प्रति एक निश्चित स्थान पर खड़े होकर या उसके इर्द-गिर्द घूमकर कुछ सामान चाहे वह खाद्य सामग्री हो या कुछ और, नियमित रूप से वितरण करने लग जाते हैं और उस स्थान का नाम स्वयं के नाम से जोड़ देते हैं। एक पार्क में प्रात: भोर से ही देखने को मिलता है, जहां एक निहायत ही सज्जन बाबा जी टॉफी, चूरण की गोलियां और बादाम आदि घूम-घूम कर महिला-पुरुषों के साथ बच्चों को बांटते रहते हैं। पार्क में एक निश्चित जगह बनी पगडंडियां क्रॉस करती हैं वहीं बाबाजी अपनी टॉफियां बांटने खड़े हो जाते हैं। उस स्थान को पार्क में घूमने वाले लोग ‘बाबाजी का चौराहाÓ नाम से जानने लगे हैं। पार्क में घूमने के लिए आने वालों की नजरें पार्क में बाबाजी का चौराहा पर टॉफी वाले बाबा को ढूंढ़ती रहती हैं। जैसे ही बाबाजी उस चौराहे पर नजर आते हैं लोगों के हाथ उनकी तरफ टॉफी लेने के लिए खुल जाते हैं या फिर टॉफी वाले बाबा खुद आगे जाकर पुरुष, महिलाएं और बच्चों को टॉफी बांटते लग जाते हैं। बाबाजी की खुशमिजाजी देखकर कई बच्चे और बड़े उनसे टॉफियों की थैली को ही छीनकर भाग जाते हैं। बाबाजी उन्हें प्यार से डांटते और पुचकारते रहते हैं। छोटे-छोटे बच्चे तो उस स्थान को ‘बाबाजी का चौराहाÓ कहने लग गए हैं।
shivdayalmishra@gmail.com

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Jagruk Janta 26 Feb - 3 March 2020

Tue Feb 25 , 2020
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