अब तो नागपंचमी की भी… बधाई हो!

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शिव दयाल मिश्रा

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हमारी संस्कृति में बधाई का बहुत महत्व है। अगर कोई शुभ काम हो और उसमें बधाई न हो तो सब सूना-सूना। इस बधाई के अंतर्गत ही बच्चे-बच्चियों के जन्म पर या शादी-विवाह में बधावा गाया जाता है। बधावा से ही बधाई उत्पन्न हुई है। इसलिए बधाई का मतलब समाज में व्यक्ति को एक-दूसरे को जोडऩा है। होली, दीवाली, राखी, दशहरा, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी और भी नव वर्ष पर, नवरात्रा की बधाई, गणेश जन्मोत्सव, हनुमान जन्मोत्सव, ईद, गुरु जन्मोत्सव, क्रिसमस पर एक-दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं देखे-सुने जाते हैं। जब सोशल मीडिया नहीं था तो एक-दूसरे को मिलने पर बधाई और शुभकामना दी जाती थी। बड़ों को ढोक लगाकर आशीर्वाद लेने के लिए छोटे उनके पैर छूते थे। अभी भी यह परम्परा होली-दीवाली पर कायम है। जब से मोबाइल फोन आया है तब से संदेश के जरिए बधाई दी जाने लगी। वाट्सएप और फेसबुक का जमाना आने के बाद तो जैसे बधाई देने के लिए एक प्रतियोगिता सी हो गई है। जाने-अनजाने सब लोगों को ढेरों बधाई मिलती है। कई बार तो फेसबुक पर देख-पढ़कर आश्चर्य भी होता है। लोग पूरे वाकये और संदेश को पढ़े बिना ही बधाई दे देते हैं। चाहे वह संदेश गम का ही क्यों न हो। बधाई हो.. शुभ कामनाएं… शीघ्रता से पोस्ट कर दी जाती है। (कई बार किसी की मौत के संदेश के नीचे भी कमेंट बॉक्स में हार्दिक शुभकामनाएं पढऩे को मिल जाती है) अरे भाई! बधाई देना कोई बुरी बात नहीं है। जाने-अनजाने लोगों से जुड़ाव पैदा होता है। एक-दूसरे के काम आते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत कुछ समाज को मिलता है। तुरंत जानकारी एक दूसरे के पास पहुंचती है। मगर बधाई देने की होड़ में यह भी पता नहीं चलता कि जिस चीज की हम बधाई दे रहे हैं वह बधाई के लिए उपयुक्त है भी कि नहीं। किसी की मृत्यु हो जाने की पोस्ट को भी लाइक किया जाता है। लाइक का मतलब तो पसंद करना होता है। तो क्या किसी की मौत को भी पसंद किया जाता है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर नागपंचमी के भी जमकर बधाई संदेश चल रहे थे। हो सकता है लोगों ने पहले भी ऐसे बधाई संदेश पोस्ट किए हों। मगर मैंने नागपंचमी की बधाई के संदेश पहली बार पढ़े और प्राप्त किए। इस लेख माध्यम से मैं किसी की भावनाओं को आहत नहीं कर रहा हूं। अपनी-अपनी समझ है। मगर मुझे तो नाग पंचमी की बधाई से आश्चर्य हुआ। आपकी आप जानो!
shivdayalmishra@gmail.com

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