शरद विषुव यानि दिन—रात बराबर, दैवीय अनुग्रह या शक्तिपात का समय

Advertisements
Advertisements

22 सितंबर 2020 को शरद विषुव या शरद संपात (Winter Equinox) दिवस है। आज भू-मध्य रेखा पर सूर्य की किरणें लंबवत पड़ती हैं। इसी कारण सभी जगह 12 घंटे का दिन और 12 घंटे अवधि की रात होगी। हालांकि दिन और रात बराबर होने की बात केवल सिद्धान्तः होती है, वास्तविकता में नहीं। ज्योतिषिय दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है।

Advertisements

जयपुर. 22 सितंबर 2020 को शरद विषुव या शरद संपात (Winter Equinox) दिवस है। आज भू-मध्य रेखा पर सूर्य की किरणें लंबवत पड़ती हैं। इसी कारण सभी जगह 12 घंटे का दिन और 12 घंटे अवधि की रात होगी। हालांकि दिन और रात बराबर होने की बात केवल सिद्धान्तः होती है, वास्तविकता में नहीं। खगोलविदों के अनुसार पृथ्वी का साढ़े 23 डिग्री तक का झुकाव होने से दिन-रात की लंबाई में परिवर्तन होता है और पृथ्वी पर सूर्य के परिक्रमण से ही मौसम परिवर्तन का कारण बनता है।

ज्योतिषिय दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। शरद् विषुव वह समय-बिंदु है जब सूर्य उष्णकटिबंधीय राशि चक्र के माध्यम से अपने पथ में विपरीत संतुलन बिंदु तक पहुंचता है। इस प्रावस्था में भी दिन और रात की लम्बाई समान हो जाती है। यह विषुव 23 सितम्बर के आस-पास होता है। इस विषुव में सूर्य तुला राशि, जोकि मेष राशि के विपरीत है, के पहले अंश में प्रवेश करता है। यह समय लगभग 22—23 सितंबर को आता है।

ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार यह योग या स्थिति तब बनती है जब सूर्य कन्या राशि से तुला राशि में संक्रमण करता है। मान्यता है कि शरद विषुव में शक्तिपात होता है। यह पृथ्वी पर दैवीय अनुग्रह का दिन है जिसका विशेष प्रभाव होता है। वृहत संहिता में भी उल्लेख है कि सूर्य के परिवर्तनों का मनुष्य सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।

शरद्कालीन सम्पात 22 सितम्बर 2020 मंगलवार
शरद्कालीन सम्पात समय – शाम 07:00 बजे
शरद्कालीन सम्पात सूर्योदय – सुबह 06:10 बजे
शरद्कालीन सम्पात सूर्यास्त – शाम 06:17 बजे
शरद्कालीन सम्पात दिन की अवधि – 12 घंटे 07 मिनट्स 53 सेकेंड
शरद्कालीन सम्पात पिछले दिन की अवधि – 12 घंटे 09 मिनट्स 35 सेकेंड
शरद्कालीन सम्पात आगामी दिन की अवधि – 12 घंटे 06 मिनट्स 11 सेकेंड

Advertisements
Advertisements

Next Post

गंगा जल में होती है बीमारी वाले बैक्टीरिया को मारने की ताकत, हिमालय से आने पर इसमें आ जाते हैं औषधीय गुण

Tue Sep 22 , 2020
विष्णु पुराण के मुताबिक भगवान विष्णु के बाएं पैर के अंगूठे से निकली है गंगा हिंदू धर्म में गंगा नदी को देवी के रूप में बताया है। बहुत से तीर्थ स्थान गंगा नदी के किनारे पर बसे हैं। जिनमें वाराणसी और हरिद्वार खास हैं। गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है। साथ ही ये मान्यता भी है कि गंगा में नहाने से इंसान के पाप खत्म हो जाते हैं। मरने के बाद लोग गंगा में अस्थि विसर्जित करना जरूरी समझते हैं। माना जाता है ऐसा करने से मोक्ष मिलता है। इसलिए धार्मिक और मांगलिक कामों में गंगाजल का उपयोग खासतौर से किया जाता है। माना जाता है कि गंगाजल से पीने और छिड़कने से पवित्र हो जाते हैं। गंगा जल को पवित्र मानने के पीछे धार्मिक कारणों के साथ साथ कई वैज्ञानिक तथ्य भी […]

Other Stories