राज्यसभा से नागरीकता संशोधन विधेयक पास होने के बाद से ही लगातार असम में इसका विरोध हो रहा है। इस बिल में यह प्रावधान किया गया है कि अब पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले “अल्पसंख्यक समुदाय” जैसे हिन्दू सिख बौद्ध पारसी और ईसाई समुदाय अगर भारत में शरण लेते हैं तो उनके लिए भारत की नागरिकता हासिल करना आसान हो गया है। यह विधेयक उन पर लागू होगा जिन्हें इन तीन देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए जाने के कारण भारत में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन इनर लाइन परमिट वाले राज्य ( यानी […]

गौहर रजा, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर देश के आम लोगों के लिए चंद्रयान-2 अभियान कितना महत्व रखता है? रॉकेट, सैटेलाइट, ऑर्बिटर, लैंडर या रोवर जैसे शब्द उसके जीवन में शामिल ही कब रहे हैं। मगर इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने से पहले यह समझना ज्यादा जरूरी है कि जिस देश की संपदा ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने निचोड़ ली थी, उसने आजादी मिलते ही अंतरिक्ष विज्ञान की ओर बढ़ने का फैसला क्यों किया? भारत जब आजाद हुआ था, तब वह भुखमरी और बेरोजगारी से तो लड़ ही रहा था, यहां की 70 फीसदी से ज्यादा आबादी अनपढ़ लोगों की थी। मगर उस […]

जिनके लिए संगीत शोर नहीं सुकून था, राहत था, प्रेम की गहराई में धंसने और भींगकर बाहर निकलने का अवसर था। प्रेम के लिए खुला आकाश और आंसुओं के लिए मुलायम तकिया था।खय्याम की शख्सियत का अंदाजा उनके शानदार संगीत से लगाया जा सकता है।कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है’ ,जैसे ही यह गीत सुनते है जहन में संगीत के जादूगर संगीतकार खय्याम नाम आता है ।खख्याम साहाब का पूरा नाम मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी था लेकिन फिल्म जगत में उन्हें खय्याम के नाम से पहचान मिली आज खय्याम के संगीत की दुनिया दीवानी है पंजाब के नवांशहर […]

-विभूषण, वरिष्ठ साहित्यकार बीते पांच अगस्त को केंद्र की राजग सरकार ने जो कुछ बड़े ऐतिहासिक फैसले लिये हैं, अनुच्छेद 370 एवं 35ए की समाप्ति, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाना, जम्मू-कश्मीर को दिल्ली की तरह एक केंद्र शासित प्रदेश बनाना, वह अप्रत्याशित लग सकता है, पर है नहीं. इस फैसले को कुछ लोग ‘फाइनल सॉल्यूशन’ (अंतिम समाधान) कह रहे हैं, वे सब एक बड़ी गलती कर रहे हैं. नाजियों ने द्वितीय विश्व युद्ध में जनवरी, 1942 में ‘फाइनल सॉल्यूशन’ का इस्तेमाल अपनी योजना के संदर्भ में किया था. उनकी भाषा व्यंजनापूर्ण होती थी. जनवरी 1942 में नाजी नेतृत्व ने […]

अनुच्छेद-370 और 35-ए के प्रावधानों को हटाने, लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करने और दोनों को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का केंद्र सरकार ने साहसिक और ऐतिहासिक फैसला किया है। किसी को भी यह अंदाज नहीं होगा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद इतनी जल्दी यह कदम उठाएगी। निश्चय ही, सरकार ने इस महत्वपूर्ण निर्णय पर पहुंचने से पहले इसके घरेलू और बाहरी, दोनों परिणामों को आंका होगा। हालांकि अब भी यदि कोई परेशानी, खासतौर पर घरेलू मुश्किलें आती हैं, तो उनको जल्द ही दूर कर लिया जाएगा और कश्मीर को अलग रखने […]

जम्मू-कश्मीर से जुड़ी अधिसूचना को लेकर पूरे देश में काफी बहस छिड़ी हुई है। उसे लेकर परस्पर विरोधी दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोग केंद्र सरकार की नीयत को लेकर आशंका जता रहे हैं, तो कुछ लोगों को सरकार के अधिकार क्षेत्र को लेकर असमंजस है। मीडिया में आने वाली कुछ खबरों में कहा जा रहा है कि अनुच्छेद 370 को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, तो कुछ लोग यह मान बैठे हैं कि जम्मू-कश्मीर राज्य तुरंत प्रभाव से दो भागों में बांट दिया गया है। वास्तविक स्थिति इससे अलग है। पहला यह कि अनुच्छेद 370 को […]

एक देश, एक चुनाव यानी ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मामला फिर से सुर्खियों में है। केंद्र सरकार इसे राष्ट्र का एजेंडा बताकर इस पर आगे बढ़ने को इच्छुक है, जबकि कई दलों ने इसके खिलाफ खुलकर अपनी राय जाहिर की है। हालांकि इसका व्यावहारिक पक्ष याद दिलाने वाले यह भूल जाते हैं कि साल 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ हो चुके हैं। उनमें व्यावहारिकता को लेकर किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई थी। साल 1967 के बाद चूंकि कई बार लोकसभा और कई राज्य विधानसभाएं जल्दी व अलग-अलग समय पर […]

अब जब जनादेश आ चुका है और एक नई व्यवस्था केंद्र में मजबूती से स्थापित हो चुकी है, तब सवाल यह उठता है कि नई सरकार अपनी विदेश नीति को कौन-सी दिशा देगी और इसमें कितना फेरबदल किया जाएगा? कहना गलत नहीं होगा कि इस चुनाव का अनुभव कसैला रहा है और विकास व जन-कल्याण के सामान्य मुद्दों की तुलना में रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसले इस पर कहीं ज्यादा हावी रहे। इस कठिन और थका देने वाले चुनाव के कुछ झटके बेशक अब भी महसूस किए जा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम जनता के […]

राजनीतिक दलों का चुनावी अभियान चरम पर है, पर जनता अब भी किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में नजर आ रही है। पांच साल से भाजपा सत्ता में थी। उससे पहले कांग्रेस। आज फिर दोनों आमने-सामने हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का आधे से ज्यादा सफर पूरा हो गया है। दो दिन बाद राजस्थान में मतदान की बारी है। राजनीतिक दलों का चुनावी अभियान चरम पर है, पर जनता अब भी किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में नजर आ रही है। पांच साल से भाजपा सत्ता में थी। उससे पहले कांग्रेस। आज फिर दोनों आमने-सामने हैं। वही जाति, धर्म की बातें। एक-दूसरे पर […]

मर्सी ने होश संभालते ही हिंसा और बर्बादी का मंजर देखा। उनका घर दक्षिण सूडान में था। घर के हालात बिगड़े, तो उन्हें पड़ोसी मुल्क युगांडा के बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया गया। इसी स्कूल में चचेरे भाई-बहन भी पढ़ते थे, इसलिए वहां कभी घर की कमी नहीं खली। पढ़ाई में खूब मन लगता था। अब वह कक्षा छह पास कर चुकी थीं। मन में ढेरों सपने थे। बड़े होकर डॉक्टर बनूंगी या वकील? कभी चंचल मन कहता, रॉक स्टार बन जाऊं। जब स्टेज पर गाऊंगी, तो फैंस दीवाने हो जाएंगे। बात 2008 की है। तब वह 15 साल की […]

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