घर के आंगन में किसी चिडिय़ा का बैठना, नन्हीं-नन्हीं चोंचों से चुग्गा चुगना हमें कितना सुकून देता है। ऐसे ही हमारे प्रदेश के आंगन में भी सर्द मौसम शुरू होते ही देश-दुनिया के हजारों पक्षी हर वर्ष आते हैं। ऐसा नहीं है कि प्रदेश ही देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटी-छोटी झीलों, तालाबों, नहरों के ईद-गिर्द पक्षियों की चहल-कदमी मन को सुकून देती है। ऐसे में सांभर झील पधारे देशी-विदेशी पक्षियों के लिए यहाँ की झील कालगृह बन रही है। कारण क्या है, अभी तक समझ से परे हैं। देश-दुनिया में नमक के लिए प्रसिद्ध सांभर झील अब नमक के […]

रामजन्म भूमि विवाद सुप्रीम कोर्ट के जरिए समाप्त हो गया। सभी पक्षकारों को कुछ ना कुछ मिला। वैसे तो रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद कई शताब्दी पुराना है। अनेकों प्रयास हुए, विफल रहे। पर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देश ने जिस मर्यादा में रहकर ग्रहण किया है, उसे आने वाले वर्षों में एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा। जब भी कोई विवाद एक हद से ज्यादा लंबा खिंच जाता है तो समय के साथ उसकी जटिलता बढ़ती चली जाती है। फैसला आने से पहले सबकी सांसें थमी हुई थीं। सवाल यह तो था ही कि फैसला क्या होगा, यह […]

चंद्रमा अब बदल गया है। बेशक, कोई बदलाव चांद में नहीं हुआ, लेकिन चांद के बारे में हमारी सोच अब बदल गई है। हालांकि हमारी कुछ मान्यताएं कभी नहीं बदलतीं। जैसे जिन मान्यताओं में चांद एक देवता है, उनमें वह देवता ही रहेगा। या उन मान्यताओं में, जहां चांद के दो टुकड़े कर दिए गए थे, वहां भी कुछ बदलाव नहीं होने वाला। फिलहाल हमारे लिए धारणाओं के वे बदलाव ही महत्वपूर्ण हैं, जो 20वीं सदी से तब सामने आने शुरू हुए, जब विज्ञान ने खूबसूरत चांद की पथरीली सतह को छूने की कोशिशें शुरू कीं। उस समय दुनिया में […]

देश के सालाना बजट को अक्सर आर्थिक संतुलन बिठाने की बाजीगरी कहा जाता है। सरकार की तमाम योजनाओं, ढेर सारे चुनावी वादों और हर किसी की आशाओं, आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सभी के लिए कुछ न कुछ करना आसान काम नहीं होता। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में जो बजट पेश किया, वह भी इस रुझान का अपवाद नहीं है, बावजूद इसके कि उन्होंने बजट की अंतर्वस्तु और उसके प्रस्तुतिकरण में बहुत सारे बड़े बदलाव करने की कोशिश की। इन बदलावों की चर्चा बाद में, पहले करते हैं प्रावधानों की बात। इस बजट से सबकी उम्मीदें बहुत […]

अगर कहा जाए कि उत्तर भारतीय राज्यों में चिकित्सा क्षेत्र की सेहत ठीक नहीं है, तो न किसी को आश्चर्य होगा और न ज्यादा अफसोस। भारतीय नीति आयोग ने मंगलवार को स्वास्थ्य सूचकांक जारी किया है, जिसमें एक बार फिर उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान को सबसे फिसड्डी पाया गया है। केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब भारतीय राज्यों के बीच अपेक्षाकृत ज्यादा सेहतमंद हैं। जन्म दर, मृत्यु दर सहित स्वास्थ्य सेवा के अनेक महत्वपूर्ण पैमानों पर आकलन करके यह सूचकांक जारी किया गया है, जिसके जरिए बीमार भारत की जो तस्वीर दिख रही है, वह […]

अनंतनाग में सीआरपीएफ के गश्ती दल पर हुए आतंकी हमले ने चिंता बढ़ी दी है। हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हुए हैं। इस साल फरवरी में पुलवामा हमले के बाद चलाए गए बड़े अभियान में कई आतंकी मारे गए लेकिन कुछ दिनों की शांति के बाद स्थितियां फिर गड़बड़ाती दिख रही हैं। कई जगहों पर छिटपुट मुठभेड़ें हुई हैं और कुछ मामलों में भीड़ की पत्थरबाजी भी देखने को मिली है। इस तरह हालात एक बार फिर पुराने मुकाम पर ही लौटते नजर आ रहे हैं। अल्पसंख्यक से बहुसंख्यक होते ही इस्लाम पू रे जिहादी रंग पर आ […]

जो जीता वही सिकंदर की कहावत पुरानी है, लेकिन कम से कम वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं होती। वह इसलिए सिकंदर नहीं हैं कि जीत गए, बल्कि वह इस बार की चुनावी लड़ाई के अकेले सिकंदर थे, इसलिए उनका जीतना तो शायद लड़ाई शुरू होने से पहले ही तय था। उनका खुद का पराक्रम ही नहीं, उनकी अश्वरोहिणी सेनाएं भी मुख्य विरोधियों और क्षत्रपों से कहीं बड़ी थीं। नतीजा यही कहता है कि उनकी रणनीति ने विरोधियों की हर चाल को इस कदर नाकाम कर दिया कि वे हारे ही नहीं, बल्कि रणक्षेत्र में बौने भी साबित हुए। […]

आज इंग्लैंड में 12वें विश्व कप क्रिकेट की शुरुआत भारत के लिए खुशी और उत्साह का अवसर है। भारत में क्रिकेट ऐसा उपयोगी खेल बन चुका है, जो लोगों को धर्म, संप्रदाय, जाति से ऊपर ले जाकर परस्पर जोड़ता और प्रेरित करता है। भारत चूंकि दो बार (1983 और 2011) विश्व कप जीत चुका है, एक बार फाइनल (2003) में पहुंच चुका है और तीन बार (1987,1996, 2015) सेमीफाइनल में खेल चुका है, इसलिए हम कह सकते हैं कि क्रिकेट एक ऐसा खेल है, जिसमें हम विगत दशकों में शीर्ष या शीर्ष के करीब रहे हैं। भारत में क्रिकेट की […]

error

Jagruk Janta