शिव दयाल मिश्रा आज चारों तरफ से स्वदेशी अपनाने का शोर मचा हुआ है। सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों से भी स्वदेशी की आवाज उठ रही है। मगर आवाज उठाने और उसकी क्रियान्विति में बहुत बड़ा अंतर होता है। स्वदेशी सामान में सुई से लेकर बड़े-बड़े कारखानों में उत्पादन होने वाला सामान सम्मिलित होता है। सामान ही क्या, सामान के अलावा गायें भी हमारे पास देशी नहीं रही। अधिक दुग्ध उत्पादन के चक्कर में देसी गाय-भैंसों से दूरी बन गई और ये भी जर्सी आ गई। जर्सी गाय-भैंसों के चलते हमारे देश में देसी गायों की नस्ल ही खतरे में […]

–शिव दयाल मिश्रा इस महामारी के दौर में कई तरह की मार पड़ रही है। किसी को बीमारी की मार। किसी को रोजगार की मार। किसी को रिश्तेदारों की मार। किसी को परिवार की मार। कई मार तो ऐसी पड़ रही है कि उसका बखान भी नहीं किया जा सकता। यूं तो इस मार से गरीब और अमीर दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं। मगर एक तरह के लोग ऐसे भी हैं जो मार से मर तो रहे हैं मगर उनकी जो चीख निकल रही है। उसे सुनने वाला कोई नहीं है। इसलिए वे उस मार से पीडि़त होकर चिल्लाने […]

शिव दयाल मिश्रा जिंदगी में मनुष्य की कुछ आदतें पड़ जाती हैं। जिनमें कुछ अच्छी आदतें होती हैं और कुछ बुरी आदतें। अब आदत तो आदत ही होती है। इसमें होता क्या है कि जिस आदमी की जो आदत पड़ जाती है उसे उस आदत के अच्छी होने या बुरी होने का कोई फर्क नहीं पड़ता है। उससे चाहे नुकसान हो या फायदा। बस उसकी आदत हो गई। हम जीवन में देखते हैं कि कई लोग ऐसे होते हैं जिनसे किसी काम के बारे में एक बार कह दो कि भई ये काम तुम्हें ऐसे करना है। उस आदमी को […]

शिव दयाल मिश्रा आजकल एक चर्चा बड़े जोर-शोर से हो रही है कि गंगा साफ हो गई। जमना साफ हो गई। फलां जगह से फलां पहाड़ साफ दिखाई देने लगे हैं। सड़कों पर भी प्रदूषण नहीं है। जो काम हजारों करोड़ लगाकर नहीं हो सका वह इस लॉकडाउन से संभव हो गया। ये चर्चा लॉकडाउन के प्रथम चरण के बाद ही होने लग गई थी। अगर सच में ऐसा है तो सरकार को चाहिए कि प्रतिवर्ष हर छह महीने बाद कुछ समय के लिए लॉकडाउन होना चाहिए। इस तरह के लॉकडाउन से कोई आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं […]

शिव दयाल मिश्रा जब से दुनिया कोरोना की चपेट में आई है, तभी से लोग भीड़ से बचने लगे हैं। भीड़ की तो बात छोड़ो, लोग तो एक-दूसरे से भी बचने लगे हैं बचने क्या लगे हैं उन्हें बचने की सलाह दी जा रही है। भीड़ से दूरी होने पर जनता इस महामारी से अपना बचाव कर पा रही है। मगर ये जो सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दी जा रही है इसे बहुत बड़ी संख्या में मान नहीं रहे हैं। गली-मोहल्ले में लोगों में कोई डिस्टेंसिंग नहीं देखी जा रही। जबकि ये बीमारी से बचाव के लिए है, मगर ये […]

शिव दयाल मिश्रा कोरोना महामारी में सबसे बड़ा जो बदलाव देखने को मिला है वह है एक-दूसरे से दूरी बनाना। पहले चाहे झूठा ही सही, एक दूसरे का खास बनने का दिखावा करना होता रहा है। मगर अब चाहे कोई कितना ही पास हो वह आपसे दूरी बनाएगा ही। यह कोरोना ही तो है जो किसी परिजन की मृत्यु होने पर भी उसे दूर से ही बाय-बाय कर रहा है। कई मामलों में तो अंतिम संस्कार भी दूसरे ही कर रहे हैं। दूसरी तरफ एक बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिलेगा। जिसके अंतर्गत ये जो बड़े-बड़े विवाह स्थल दिखाई दे […]

शिव दयाल मिश्रा रामायण में संत तुलसीदास जी ने एक चौपाई लिखी है- नहीं दरिद्र सम दुख जग माहीं। संत मिलन सम सुख जग नाहीं।। संसार में संत मिलन के समान सुख नहीं है और दरिद्रता के समान दुख नहीं है। इसलिए शुरू से ही दरिद्रता को दूर करने के लिए अनवरत प्रयास किए जा रहे हैं। मगर ये दरिद्रता (गरीबी) मिटने का नाम ही नहीं ले रही है। कहते हैं कि दुनिया में कुछ भी अमर नहीं है। कुछ भी स्थाई नहीं है। मगर ऐसा नहीं है। दुनिया में बहुत सी ऐसी स्थिति और परिस्थितियां हैं जो स्थाई बन […]

शिव दयाल मिश्रा आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। इसी के चलते लोगों के दिल, दिमाग, शकल और जीवन शैली सब बदल गई है। और इस महामारी का पता नहीं कितना भारी बदलाव जीवन में आएगा। लोगों की तो शक्ल ही बदल गई है। किसी की दाढ़ी तो किसी के बाल बढ़ गए हैं। किसी के अंग-व भी फट गए हैं, मगर खरीद नहीं पा रहे हैं। कुछ लोग बंद घरों में दिनभर खाने में लगे रहते हैं। दूसरी तरफ देखें तो लोगों को खाने के लाले पड़े हुए हैं। कितने ही लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने […]

शिव दयाल मिश्रा कोरोना तो दिन प्रतिदिन सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही जा रहा है। मगर हो सकता है हनुमानजी की तरह मनुष्य भी उसके मुंह में प्रवेश कर कान में होकर जीवित ही निकल जाएगा। एक तरफ कोरोना से चल रही जंग जीतनी है तो दूसरी तरफ हमारे जीवन में रोजमर्रा की जरूरत और सुरक्षा से जुड़ी हुई स्थितियों को भी देखना है। जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून का आगमन हो जाता है। इससे पहले गांवों में किसानों को खेत में काम करना जरूरी होता है। इसी प्रकार शहरों में बरसात को ध्यान में रखते हुए […]

शिव दयाल मिश्रा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। पिछले महीने की 20 तारीख से ही लगभग पूरा भारत लॉक डाउन में चल रहा है। हालांकि औपचारिक रूप से 22 मार्च को एक दिन का तथा उसके बाद 25 मार्च से अब तक लगातार देश में लॉक डाउन जारी है। इस दौरान देश में कोरोना संक्रमितों के आंकड़े दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। अब भारत के गृह मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार लॉक डाउन में सशर्त छूट दी गई है। उसमें भी राज्य अपनी सुविधा और व्यवस्था के अनुसार लॉक डाउन में छूट देंगे। इस दौरान देश […]

शिव दयाल मिश्राआज जिस तरह कोरोना का चारों तरफ तांडव मचा हुआ है। हर कोई भयभीत हो रहा है और अधिकांश व्यक्ति अपने आपसे ही प्रश्न भी कर रहा है कि कहीं मैं भी तो इससे ग्रसित नहीं हो रहा हूं। परन्तु वास्तविकता कुछ समय बाद ही सामने आएगी कि इस बीमारी से कौन अछूता है। अभी तक राजस्थान में जयपुर के रामगंज क्षेत्र में सबसे अधिक संक्रमित लोग सामने आए हैं। बाकी कुछ अन्य क्षेत्र भी हैं जहां कोरोना संक्रमित लोग सामने आ रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग यह सोचकर अपने आपको धन्यवाद दे रहे होंगे कि हम […]

शिव दयाल मिश्रा दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। तुलसी दया न छोडि़ए, जब लगि घट में प्रान।। जब से कोरोना वायरस के चलते देश में लॉक डाउन चालू हुआ है तभी से सरकार अपने स्तर पर गरीबों का पूरा ध्यान रख रही है। ऐसे में हमारे देश की धर्म प्राण जनता भी जरूरत मंदों के लिए अपनी शक्ति के अनुसार अन्न-धन के साथ सहायता में जुट गई है। मनुष्य तो क्या हमारे देश की जनता जिसके रग-रग में दया भाव ओतप्रोत है, पशु पक्षियों के लिए चारा और चुग्गा भी उपलब्ध करवा रही है। यही तो हमारी […]

शिव दयाल मिश्रा इस समय पूरा विश्व भयंकर महामारी ‘कोरानाÓ की चपेट में है। विश्व के प्रत्येक देश के मुखिया और वहां की सरकार अपने-अपने नागरिकों को इस बीमारी से बचाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। चिकित्सा व्यवस्थाएं तो कर ही रहे हैं मगर इससे भी बढ़कर वो सारे उपाय कर रहे हैं जिनसे प्राणी मात्र का जीवन बचाया जा सके। इसी कड़ी में हमारे देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी बार-बार जनता के समक्ष आकर उनसे सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं। कोरोना को पराजित करने के लिए हौंसला बढ़ते हुए कभी ताली-थाली बजवा रहे […]

शिव दयाल मिश्रा ईश्वर की गति को कौन जान सकता है। कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि पूरा देश एक साथ नजरबंद हो जाएगा। मगर यह सच है कि आज पूरा देश एक साथ घर में नजरबंद हो गया। यह ईश्वर की व्यवस्था का ही एक हिस्सा है कि प्राकृतिक आपदा के चलते एक अपील हुई और स्वस्फूर्त लॉक डाउन हो गया। प्रकृति से कोई कभी जीत नहीं सका है और न ही आगे कोई जीत पाएगा। एक दिन के लिए कोई घर पर रुकने के लिए तैयार नहीं होता था। इस समय देश में 21 दिन का […]

शिव दयाल मिश्रा‘नमस्ते संस्कृत का शब्द है जिसका संधि विच्छेद ‘नम: तेÓ होता है। जिसका तात्पर्य नमन करना है। ये तो हुआ नमस्ते का अर्थ। जब नमस्ते की शारीरिक क्रिया को देखते हैं तो दोनों हाथों को जोडऩा पड़ता है। यानि की किसी को अभिवादन करने के लिए हम उसके समक्ष दोनों हाथ जोड़कर सिर को झुकाते हैं। जिसके जवाब में सामने वाला भी उसी प्रकार नमस्ते करते हुए अपने अभिवादन का जवाब देता है। हमारी संस्कृति अर्थात भारतीय संस्कृति की एक-एक क्रिया और व्यवस्था मनुष्य के शरीर और समाज के प्रत्येक प्राणी को स्वस्थ और शांति से जीवन व्यतीत […]

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