शिव दयाल मिश्रा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बड़े-बड़े क्रांतिकारी शामिल थे। अंग्रेजों की लड़ाई में बहुत से राजघरानों के राजा-महाराजाओं ने हिस्सा लिया और अंग्रेजों के खिलाफ संग्राम छेड़ दिया। हालांकि कुछ लोग राजनीति से प्रेरित होकर अथवा अनजाने में उस संग्राम को गदर कह देते हैं। मगर गदर और स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ा अंतर है। खैर यह एक अलग विषय है। 1857 के संग्राम में झांसी की महारानी लक्ष्मी बाई भी अंग्रेजों के खिलाफ खूब लड़ी थी। झांसी के किले में आज भी उनकी याद बिखरी पड़ी है। उनका निजी निवास, किले की जिस बुर्ज से वे […]

शिव दयाल मिश्रा कोरोना महामारी के चलते विश्व पहले से ही जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहा है। पता नहीं कब किसको कोरोना हो जाए। अगर जांच भी कराई जाती है तो क्या गारंटी है कि वह अब कोरोना पोजीटिव नहीं होगा। जांच के बाद अस्पताल से निकलते ही दुबारा कोरोना हो जाए तो आप क्या कर लोगे। इसलिए हर कोई कोरोना से लड़ते हुए सावधानी बरत रहा है। मगर इन परिस्थितियों के बीच विश्व के सामने एक और खतरा उत्पन्न हो गया है। दुनिया में कई देशों के बीच युद्ध के हालात बने हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि विश्व […]

शिव दयाल मिश्रामहाभारत में भीषण युद्ध चल रहा था द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर को बंदी बनाने के लिए चक्रब्यूह की रचना कर डाली। उस समय चक्रब्यूह को तोडऩे की विद्या सिर्फ अर्जुन में थी, जिसे रणनीति के तहत सात्यकी युद्ध करते हुए दूर ले गया और पीछे से महारथियों की भीड़ ने अर्जुन को घेर लिया और घेर कर प्रहार करते रहे आखिर अभिमन्यु मारा गया। तो इस समय कोरोना महामारी के प्रहार से घायल जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। अपने अस्तित्व को बचाने में लगी हुई है। दूसरी तरफ सरकार आए राहत देने के बजाए कई तरह के टैक्स वसूल […]

शिव दयाल मिश्रा इस समय सारी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में है और कोरोना के मरीज बढ़ते ही जा रहे हैं। इस बीच दूसरी अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों के लिए इलाज कराना बहुत बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। ये तो है नहीं, कि बीमारी सिर्फ कोरोना की ही है बाकी सब गायब हो गई। बाकी बीमारियां भी अपनी जगह पर मौजूद है। मगर वे कोरोना के शोर में दब सी गई हैं। इस समय स्थिति ये है कि बीमार को इधर से उधर अस्पतालों के धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसी […]

शिव दयाल मिश्रा हमारी संस्कृति में बधाई का बहुत महत्व है। अगर कोई शुभ काम हो और उसमें बधाई न हो तो सब सूना-सूना। इस बधाई के अंतर्गत ही बच्चे-बच्चियों के जन्म पर या शादी-विवाह में बधावा गाया जाता है। बधावा से ही बधाई उत्पन्न हुई है। इसलिए बधाई का मतलब समाज में व्यक्ति को एक-दूसरे को जोडऩा है। होली, दीवाली, राखी, दशहरा, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी और भी नव वर्ष पर, नवरात्रा की बधाई, गणेश जन्मोत्सव, हनुमान जन्मोत्सव, ईद, गुरु जन्मोत्सव, क्रिसमस पर एक-दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं देखे-सुने जाते हैं। जब सोशल मीडिया नहीं था तो एक-दूसरे को मिलने […]

शिव दयाल मिश्रा जमाना बदल रहा है। जमाने के साथ हमारा देश बदल रहा है। हम बदल रहे हैं। हमारी दिनचर्या बदल रही है। सोने-जागने का समय बदल रहा है। खान-पान बदल रहा है। पहनावा बदल रहा है। रिश्ते-नाते बदल रहे हैं। पहले गांव में आपस पड़ौसियों के बच्चों में बहन-भाई का रिश्ता होता था। आजकल भाई-बहन की जगह फ्रैंड्स कहना-सुनना ज्यादा पसंद किया जा रहा है। परिवार की परिभाषाएं बदल रही हैं। संयुक्त परिवार की जगह ‘हम दो-हमारे दोÓ ने ले ली है। बढ़ती जनसंख्या के कारण कुछ रिश्ते तो इस समय गायब ही होते जा रहे हैं। जैसे […]

शिव दयाल मिश्रा वर्तमान में सेल्फी लेने का शौक अपनी चरम पर है। छोटे से लेकर बड़े कार्यक्रम हो, यात्रा कार्यक्रम हो, अनुष्ठान हो, किसी से मिलना हो, हंसना, रोना, गाना, बजाना, सुख-दुख के क्षण। यहां तक कि किसी दुर्घटना में किसी की जान पर बन रही होती है वहां भी लोग बड़ी तत्परता से सेल्फी लेने लग जाते हैं, जबकि तत्परता दिखानी चाहिए उसकी जान बचाने में। कई बार तो स्टंटबाजों को सेल्फी लेते देखा जा सकता है। चाहे उनकी स्वयं की जान ही क्यों नहीं चली जाए। इन सबके चलते बेचारे पौधे कहां बच सकते हैं। बरसात से […]

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