हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि और रविवार दिन है। सुबह 08 बजकर 22 मिनट के बाद त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा। इस वजह से आज ही प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव शंकर की विधि विधान से पूजा की जाती है। आज पंचांग में शुभ मुहूर्त, राहुकाल, दिशाशूल के अलावा सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त और दैनिक राशिफल आदि के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। आज का पंचांग दिन: रविवार, भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी तिथि। आज का दिशाशूल: पश्चिम। आज का पर्व एवं त्योहार: प्रदोष। आज का राहुकाल: शाम 04:30 बजे से 06:00 बजे तक। विक्रम संवत 2077 शके 1942 दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की द्वादशी 08 घंटे 22 मिनट तक, तत्पश्चात् त्रयोदशी उत्तराआषाढ़ा नक्षत्र 13 घंटे 52 मिनट तक, तत्पश्चात् श्रवण सौभाग्य योग […]

ओणम उत्सव में की जाती है भगवान वामन और पाताल के राजा बलि की पूजा, माना जाता है इस दौरान महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं पृथ्वी पर 29 अगस्त को वामन जयंती है। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि पर वामन प्रकोटत्सव मनाया जाता है। भागवत कथा के आठवें स्कंध के आठरहवें अध्याय की कथा के अनुसार सतयुग में इस दिन भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया था। ये अवतार श्रीमद्भागवत कथा में बताए गए चौबीस अवतारों में पंद्रहवा था। केरल के कोच्चि में थ्रिक्काकरा में भगवान वामन का मंदिर है। वामन जयंती पर यहां खास पूजा की जाती है और इसके बाद ओणम पर्व की शुरुआत होती है। यहां के लोगों का मानना है कि ओणम उत्सव के दौरान राजा बलि यहां आते हैं। केरल का भगवान वामन मंदिर थ्रिक्काकरा मंदिर कब […]

विद्वानों के अनुसार ये पर्व अलग-अलग जगहों पर श्रीकृष्ण जन्म के बाद होने वाली जल पूजा, घाट पूजा और सूरज पूजा के रूप में मनाया जाता है हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहते हैं। इसे परिवर्तिनी एकादशी व डोल ग्यारस आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान वामन की पूजा की जाती है। इस बार यह एकादशी 29 अगस्त, शनिवार को है। नर्मदापुरम के भागवत कथाकार पं. हर्षित कृष्ण बाजपेयी का कहना है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की घाट पूजा की गई थी। ये पर्व अलग-अलग जगहों पर श्रीकृष्ण जन्म के बाद होने वाले मांगलिक कार्यक्रम जल पूजा, घाट पूजा और सूरज पूजा के रूप में मनाया जाता है। परिवर्तिनी यानी जल झूलनी एकादशी व्रत की विधि और महत्व परिवर्तिनी एकादशी व्रत का नियम पालन दशमी […]